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Showing posts from September, 2026
ठहर कर कुछ देर ही सही, अपने सफ़र को जी लिया करो, ऐ मुसाफ़िर, हर रास्ता ख़ूबसूरत हो, ये ज़रूरी नहीं होता। कुछ देर ही सही, उनकी क़ुर्बत में गुज़ारा करो, हर कोई तुम्हारी तरह ख़ुशनसीब नहीं होता। मैंने कहीं पढ़ा था— आने वाले हर रास्ते का मोड़ एक जैसा नहीं होता। थोड़ा ठहर कर, कुछ देर ही सही, अपने सफ़र को जी लिया करो, ऐ मुसाफ़िर, आने वाला हर रास्ता ख़ूबसूरत नहीं होता। तुम्हें हर बात पर जल्दी है जाने की, तुम्हें क्यों ठहरना नहीं आता?
जाकी भजन राम को भावे, जाकी भजन श्याम को भावे। जे मन में मोर मीत बसे, कुहू-कुहू के संगीत बसे। जो मन तोरा, सो मन मोरा, मन में न कोई बैर बसे। जे मन में श्रीराम बसे, जे मन में घनश्याम बसे। जाकी गति सो होवे नाथ, जै लिखी हो दीनानाथ। हमरो हाथ पकड़ लिजो प्रभु, भवसागर से पार की जो प्रभु। बैतरणी से तरी जो प्रभु। डूबत नैया थाम लि जो प्रभु। जस मन व्याकुल होय हमारो तस तोहे गाऊ मोरे नाथ। कर दिजो बस एको उपकर कर दे जो ई भवसागर को पार। जस मन चिंतन मिटी हो हमारा। जे नाम गोसाई सुनी गोहर। जाकी भजन राम को भावे, जाकी भजन श्याम को भावे। जे मन में मोर मीत बसे, कुहू-कुहू के संगीत बसे। राम भी मोरे, श्याम भी मोरे, मोरे मन के प्रीतम दोऊ। एक में जग सारा देखूँ, दोऊ में मोरी दुनिया होऊ। जाकी भजन राम को भावे। जाकी भजन श्याम को भावे।