जाकी भजन राम को भावे, जाकी भजन श्याम को भावे। जे मन में मोर मीत बसे, कुहू-कुहू के संगीत बसे। जो मन तोरा, सो मन मोरा, मन में न कोई बैर बसे। जे मन में श्रीराम बसे, जे मन में घनश्याम बसे। जाकी गति सो होवे नाथ, जै लिखी हो दीनानाथ। हमरो हाथ पकड़ लिजो प्रभु, भवसागर से पार की जो प्रभु। बैतरणी से तरी जो प्रभु। डूबत नैया थाम लि जो प्रभु। जस मन व्याकुल होय हमारो तस तोहे गाऊ मोरे नाथ। कर दिजो बस एको उपकर कर दे जो ई भवसागर को पार। जस मन चिंतन मिटी हो हमारा। जे नाम गोसाई सुनी गोहर। जाकी भजन राम को भावे, जाकी भजन श्याम को भावे। जे मन में मोर मीत बसे, कुहू-कुहू के संगीत बसे। राम भी मोरे, श्याम भी मोरे, मोरे मन के प्रीतम दोऊ। एक में जग सारा देखूँ, दोऊ में मोरी दुनिया होऊ। जाकी भजन राम को भावे। जाकी भजन श्याम को भावे।
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
या खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया यह सवाल मेरे मन में अवतार उम्र रहेगी तू रहेगी बेशक मेरे जहां में अब मगर भरोसा है अंदाज अब शायद ही वफा में होगी या खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया यह सवाल तुझे अबता उम्र रहेगी.... मैं करूंगी सजदा तेरा ना मेरे ईमान में कमी होगा.... मगर अब जब भी सजदा करूंगी तो मेरे सवाल में कहीं ना कहीं एतराम होगा हर दफा हर मर्तबा मेरे जहां में सवाल होगा ए खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया... क्यों तूने जरा सा भी मेरे ऊपर दरिया दिल ही नहीं दिखाई क्यों तूने मुझे मेरा पसंदीदा शख्स छीना या खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया क्या कमी रह गया था मेरे इबादत में मैंने तो उसे खुद नहीं किया फिर तूने उसे क्यों मुझे नहीं दिया या खुदा मेरे किस बात का तूने यह सजा दिया या खुदा मेरे तूने बताइए क्या किया यह जो तुम जुल्म मुझ पर ढा रहे हो यह जो सितम मुझ पर बरसा रहे हो या खुदा मेरे तुम कभी तो मुझ पर तरस खाओ कभी तो मेरे इन दस्तों को पकड़ कर कह दो कि मैं तेरे आगोश में कर रख दूं तू कर थोड़ा सा मुझ पर करम कर तू मुझ पर थोड़ा सा रहें या खुदा मेरे क्या कमी थी मेरे इबादत ...
- Get link
- X
- Other Apps
घर के सुख-चैन को त्याग कर बेटा अफसर बनने चला था। पिता भी खूब इठलाया और पूरे गाँव में ढिंढोरा पीट कर कहा था। " अब बनेगा मेरा बेटा अफसर शहर में जा के।" कई दशक बीत गए, अब बेटा आएगा घर को, जब हांडी ठन-ठनाई, तब बेटा रहा दुबक के। बेटे ने काटी खूब अय्याशी बाप के पैसे पर बढ़-चढ़ के। अब रहा ताकता वो दिन भर अपने घर के अटारी पर चढ़ के। कोई तो हाथ लगे, कोई तो बात बने, कोई तो रह जाए मेरे कारण पछता के। कैसे कोई पंक्षी उड़े उसके घर के अटारी पे आ के?! मैं पंक्षी के पंखों को काटूंगा और वो रह जाएगा छटपटा के। बेटे को कहां भनक था सब देख रहा है ऊपर वाला भी इसको टक लगा के। - राधा माही सिंह
किल्लत
- Get link
- X
- Other Apps
कोई मेरी समस्या का निवारण बताइए, बिना खाए कैसे गुजारा करें, कोई उपाय बताइए। खाना बनाते समय गैस कैसे बचाएँ, इसका भी कोई रास्ता समझाइए। हम तो जोड़ लेते थे रूम रेंट और किताबों का हिसाब, अब कैसे दें 400 रुपये गैस के, इस उलझन की कोई गुत्थी सुलझाइए। क्या हम लौट जाएँ बिना मंज़िल पाए घर को, सिर्फ इसलिए कि इस बार न पेपर लीक हुआ, न प्रश्नपत्र में सवाल गलत थे। इस बार तो बस मेरे जीवन की समस्या का कोई हल ही नहीं था — कोई मुझे घर लौटने का कारण बताइए। यह कालाबाज़ारी हम मध्यमवर्गीयों को नोच रही है, कोई इसका भी निवारण बताइए। जब गैस की इतनी किल्लत है, तो कोई समाधान निकालिए। हम खाली पेट कैसे सोएँ, कोई इस समस्या का निवारण बताइए। - राधा माही सिंह
हैपी होली
- Get link
- X
- Other Apps
अब वो स्कूल वाली होली कहाँ रही? अब गुजिया में वो मिठास कहाँ रही? अब गुलाल से ज़्यादा रिश्तों में ही रंग घुलने लगे हैं, अब त्योहारों में वो पहली-सी सौगात कहाँ रही? न वो बेफिक्री की हँसी के ठहाके कहा रही? न वो दोस्त संग रंगों की शरारत भरी वो दिन है और न वो उम्र वाली बात रही। जाने क्यों अब यादों के दर्पण मुझको खुदके ओर खींचते है... सब कुछ तो है.... फिर भी कुछ कमी - सी लगती है, वो बचपन की पिचकारी अंकल आंटी वाली प्रेम की थाली यारो के संग बांटे गए वो रंगों का वो सफेद समय अब वैसे कोई इबारत कहां रही? जीवन ने बहुत से रंग बदले,पर मन को आज भी वही रंग चाहिए जब हाथों में मेरे थे रंग बिरंगे रंग और पिचकारी का वो धार, छत से मारते गुब्बारों का ढेर घर में गूंजती किलकारियों का शोर,मगर अब वो पहले जैसे बात कहा रही? अब पहले जैसी त्यौहार कहां रही?
तू बोले तो
- Get link
- X
- Other Apps
एक तू बोले तो तेरी खुशियों के खातिर हम वैश्या भी बन सकते है। एक तू बोले तो तेरे खातिर इस ज़माने से भी लड़ सकते है। इसका-उसका,किंतु-परंतु सब छोड़ो दे तू बस एक तू बोले तो हम तेरे हो सकते है। हीरा-मोती, महल-अटारी नहीं चाहिए मुझको एक तू बोले तो हम तेरे प्रेम में जोगन हो सकते है। एक तू बोले तो हम तेरी खुशियों के खातिर हम तेरे कदमों में चूम सकते है। एक तू बोले तो तेरे खातिर मीनारों का सुख छोड़ तेरे पास दौड़े आ सकते है। एक तू बोले तेरे खातिर हम वैश्या भी बन सकते है। - राधा माही सिंह