Posts

Showing posts from January, 2026

तू बोले तो

एक तू बोले तो तेरी खुशियों के खातिर हम वैश्या भी बन सकते है। एक तू बोले तो तेरे खातिर इस ज़माने से भी लड़ सकते है। इसका-उसका,किंतु-परंतु सब छोड़ो दे तू बस एक तू बोले तो हम तेरे हो सकते है। हीरा-मोती, महल-अटारी नहीं चाहिए मुझको एक तू बोले तो हम तेरे प्रेम में जोगन हो सकते है। एक तू बोले तो हम तेरी खुशियों के खातिर हम तेरे कदमों में चूम सकते है। एक तू बोले तो तेरे खातिर मीनारों का सुख छोड़ तेरे पास दौड़े आ सकते है। एक तू बोले तेरे खातिर हम वैश्या भी बन सकते है।     - राधा माही सिंह

पूर्व प्रेमीका

मुझे कोई राह बता दो कोई मुझे उस पार करा दो। है उसका जहां ठिकाना मुझे कोई तो उस जगह पहुंचा दो। मैंने उसे मयखाने में भी ढूंढा है, वो वहां भी अब नहीं रहता!  कोई तो मुझे उसके "पूर्व प्रेमीका"  का पता दो। अच्छा छोड़ो...!!? वो कैसा है कम से कम कोई यही बता दो? क्या उसे मेरी बेख्याली नहीं खाती? क्या उसे मेरी याद नहीं आती?  क्या उसे मेरी तन्हाई नज़र नहीं आती? कोई उसे मेरा ही हाल बता दो। मैं ढूंढ रही हूँ "दर- बदर" कोई तो उस तक यह बात पहुँचा दो। वो कहा  है,कैसा है,कोई तो बता दो। - राधा माही सिंह 

रानी

कमरे में अब धूल जम चुका है।  किताबों के जगह कुछ अरमानों ने ले लिया है।  सपना अब दम तोड़ चुका है।  शीत लहर ने अब आस को जगाना छोड़ दिया है।  पिंजरे के ताला अब हमेशा के लिए बंद हो चुका है।  रानी को था यकीन उसका राजकुमार आएगा और उसे इस जहां से बचा कर कहीं दूर तलक ले जाएगा, फिर समझ आया की तालाब से दूर तलक नहीं जाया जा सकता है यह यकीन मेंढकों को हो चुका है। कंधा भले ही किसी का मिले मगर लोग जाता ही देते हैं यह बात बस सुना ही था आज रानी देख चुकी है।  यकीन था उसे आसमानों में उड़ने का, मगर आसमानों में कुछ बाज अब अपना घर बन चुके हैं। रानी फिर से एक बार पंखों को काट चुकी है।  रानी फिर से एक बार चलन से पहले,दौड़ने से पहले,डगमगाने से पहले हताश होकर बैठ चुकी है। माँ ने झूठ कहा था कि रानी झुकती नहीं है, कि रानी कभी रुकती नहीं है। अब रानी ठहर चुकी है के,हमेशा हमेशा के लिए खुद में कैद हो चुकी है, अब रानी बिखर चुकी है, थम चुकी हैं। कोई गैर नहीं है उसे तोड़ने वाला कोई अपना ही था जो उसे मार चुका है अंदर ही अंदर उसे खा चुका है कोई बेख्याली बदहवासी उसे खत्म कर चुका है अब रान...