या खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया यह सवाल मेरे मन में अवतार उम्र रहेगी तू रहेगी बेशक मेरे जहां में अब मगर भरोसा है अंदाज अब शायद ही वफा में होगी या खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया यह सवाल तुझे अबता उम्र रहेगी....
मैं करूंगी सजदा तेरा ना मेरे ईमान में कमी होगा....
मगर अब जब भी सजदा करूंगी तो मेरे सवाल में कहीं ना कहीं एतराम होगा हर दफा हर मर्तबा मेरे जहां में सवाल होगा ए खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया...
क्यों तूने जरा सा भी मेरे ऊपर दरिया दिल ही नहीं दिखाई क्यों तूने मुझे मेरा पसंदीदा शख्स छीना या खुदा मेरे तूने उसे मेरा क्यों नहीं किया क्या कमी रह गया था मेरे इबादत में मैंने तो उसे खुद नहीं किया फिर तूने उसे क्यों मुझे नहीं दिया या खुदा मेरे किस बात का तूने यह सजा दिया या खुदा मेरे तूने बताइए क्या किया यह जो तुम जुल्म मुझ पर ढा रहे हो यह जो सितम मुझ पर बरसा रहे हो या खुदा मेरे तुम कभी तो मुझ पर तरस खाओ कभी तो मेरे इन दस्तों को पकड़ कर कह दो कि मैं तेरे आगोश में कर रख दूं तू कर थोड़ा सा मुझ पर करम कर तू मुझ पर थोड़ा सा रहें या खुदा मेरे क्या कमी थी मेरे इबादत में जो तूने उसे मेरा नहीं किया??

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