प्रेम वैराग्य!
वैराग्य स्थिरता !
स्थिरता शीतलता!
शीतलता प्यास!
प्यास नीर!
नीर चंचलता!
चंचलता स्वभाव!
स्वभाव क्षणिक!
क्षणिक मनुष्य!
मनुष्य माया!
माया प्रेम!
अर्थात् जीवन एक चक्र है आप शुरू जहां कही से भी करो अंततः आपको पहचुनां वही है जहाँ से आपने प्रारंभ किया था।
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