गम था जाम लगा खुशी थी मुस्कान लगा ना जाने हर पल हर दफा इन होठो को किसी ना किसी का साथ मिला जब बिक रही थी मैं तभी ना जाने कितनों की दाम लगा मगर मेरे होठो को ना आवाज़ मिला
-राधा माही सिंह
किसी ने मुझसे पूछा, सुकून क्या है? मैंने कहा, उसका मुस्कुराना। किसी ने मुझसे पूछा, शर्म क्या है? मैंने कहा, उसका मुझसे यूं नज़रों को चुराना। किसी ने मुझसे पूछा, तड़प क्या है? मैंने कहा, उसका मुझसे वादा कर के ना मिलने आना। किसी ने मुझसे पूछा, शिद्दत क्या है? मैंने कहा, मेरा उससे एकतरफा दिल लगाना। किसी ने मुझसे पूछा, मौत क्या है? मैंने कहा, उसका मुझसे रूठ जाना। किसी ने मुझसे पूछा, फिर जज़्बात क्या हैं? मैंने कहा, मेरा उससे लिपटकर रोना और जो कभी पूरे ना हो सकें, उन ख्वाबों को बुनना। -राधा माही सिंह
ऐ ज़िंदगी, तू मुझे कहीं दूर ले चल, जहाँ बस मैं और तू ही रहें। ले चल मुझे उस फ़िज़ा में, जहाँ किसी की कोई तलब न रहे। गर मैं रहूँ ख़ामोश, तो तुम मेरे शब्दों से समझ जाना, मैं कहूँ बहुत कुछ, तो तु मेरी गहराईयों को छू लेना। ऐ ज़िंदगी, अब हम तुम्हारे ही मोहताज़ हैं, सबने सहारे छिना हैं। तिनके-तिनके के लिए तड़पी हूँ। तू ले चल मुझे वहाँ, जहाँ तेरे आगोश में सर रखकर कुछ पल सुकून का सो सकूँ, और इस जहाँ को एतराज़ भी न हो। जहाँ मैं कह सकूँ, तू सुन सके, मैं रो सकूँ, तू हँसा सके, कोई बंदिश न हो, कोई हमें झुठला न सके। ऐ ज़िंदगी, तू मिलना किसी मुसाफ़िर की तरह, जो मैं कहूँ और तू न जा सके। मैं बाँधू तुझे अपने डोर से, तू सिसक सके, मैं बिलख सकूँ। मैं रूठ सकूँ, तू मना सके, बस यूँ ही चलता रहे ये सिलसिला। तू ले चल मुझे वहाँ, जहाँ कोई और ना जा सके। - राधा माही सिंह
कोई मेरी समस्या का निवारण बताइए, बिना खाए कैसे गुजारा करें, कोई उपाय बताइए। खाना बनाते समय गैस कैसे बचाएँ, इसका भी कोई रास्ता समझाइए। हम तो जोड़ लेते थे रूम रेंट और किताबों का हिसाब, अब कैसे दें 400 रुपये गैस के, इस उलझन की कोई गुत्थी सुलझाइए। क्या हम लौट जाएँ बिना मंज़िल पाए घर को, सिर्फ इसलिए कि इस बार न पेपर लीक हुआ, न प्रश्नपत्र में सवाल गलत थे। इस बार तो बस मेरे जीवन की समस्या का कोई हल ही नहीं था — कोई मुझे घर लौटने का कारण बताइए। यह कालाबाज़ारी हम मध्यमवर्गीयों को नोच रही है, कोई इसका भी निवारण बताइए। जब गैस की इतनी किल्लत है, तो कोई समाधान निकालिए। हम खाली पेट कैसे सोएँ, कोई इस समस्या का निवारण बताइए। - राधा माही सिंह
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